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बिहार शिक्षक बहाली और शिक्षा की बदहाली

बिहार (पटना):- बिहार में बहाली और विभागों की लापरवाही के कारण यहां के अभ्यर्थियों की बदहाली तो जगजाहिर है । कहा जाता है कि बिहार में सरकारी नौकरी चाहने वालों को कई चरणों से हो कर गुजरना पड़ता है जिसमे परीक्षा इंटरव्यू और काउंसिलिंग के अतिरिक्त कोर्ट कचहरी यहां तक कि आंदोलन और लाठीचार्ज से होकर भी गुजरना पड़ता है फिर भी कोई बहाली पूर्ण हो जाए ये सब निर्भर करता है आने वाले चुनाव की समय सीमा पर । सत्ताधारी पार्टियां और सरकार विभाग की कमियां और बदहाली को दूर करने के बजाए किसी भी बहाली को वोट बैंक के नफे नुकसान रूप में देखती है और उसे भुनाने पर जोर देती है और यही वजह है कि बिहार शिक्षा के क्षेत्र में देश के सबसे निचले राज्यों में गिना जाता है ।

अब आइए जानते है बिहार में रिक्त पड़े लगभग साढ़े तीन लाख शिक्षक के पद और लंबित पड़े शिक्षक बहाली के बारे में — पहले जानते है प्राथमिक विद्यालयों के लिए शिक्षकों की भर्ती के बारे में बिहार में वर्तमान में शिक्षक नियोजन प्रक्रिया में कई खामियां है जिसे दूर करने का प्रयास ना तो सरकार के द्वारा किया गया न विभाग इस पर कभी संज्ञान लिया । 6 साल बाद बिहार पात्रता परीक्षा ली गई , रिजल्ट भी आंदोलन करने के बाद जारी किया गया फिर आंदोलन के परिणामस्वरूप ही जुलाई 2019 में 94 हजार प्राथमिक 1-5 एवं 6-8 के लिए विज्ञापन निकाला गया । जिसमे लगभग 09 हजार नियोजन इकाई में ऑफलाइन आवेदन करने की प्रक्रिया आरंभ हुई । अब आई कोर्ट कचहरी की बात । पहले एनआईओएस डीएलएड अभ्यर्थियों ने फिर बाद में दिसंबर सीटीईटी पास अभ्यर्थियों ने नियोजन प्रक्रिया में भाग नही मिलने के कारण पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया । इसी बीच विभाग द्वारा मूल विज्ञापन में बदलाव करते हुए डी एल एड को वरीयता देते हुए नियोजन पूर्ण करवाने का लेटर जारी कर दिया जिसके विरुद्ध बीएड अभ्यर्थियों ने फिर पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया । इन सब मामलों के कारण बहाली की प्रक्रिया लंबे समय तक बाधित रही । जब इन मामलों का निपटारा न्यायालय द्वारा कर दिया गया तब भी विभाग के द्वारा बहाली की प्रक्रिया को पूर्ण करने के प्रति संवेदनशील न होता देख अभ्यर्थियों ने जनवरी 2020 में पटना के गर्दनी बाग में विशाल आंदोलन का बिगुल फूंका । जिस पर सरकार ने बर्बरता पूर्वक अभ्यर्थियों पर लाठी चार्ज करवाया तब अभ्यर्थियों के समर्थन में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी पैदल मार्च किया था ।

सरकार अपनी किरकिरी होते देख आंदोलन को खत्म करने के लिए आनन फानन में न्यूज के माध्यम से बहाली जल्द पूर्ण होने की बात कही अभ्यर्थियों ने आंदोलन खत्म कर दी । इसी बीच विभाग के लापरवाही के कारण पूर्व में किया गया एक ब्लाइंड फेडरेशन केस जिसमे न्यायालय के द्वारा सम्पूर्ण बहाली पर स्टे लगने की बात कही गई । सरकार ने सदन में बहाली के संदर्भ में केस की सुनवाई 5 अप्रैल को करवाकर लीव लेकर बहाली पूर्ण करवाने की बात से पहले ही मुकर चुकी है । अब इस बहाली पर सरकार के न तो कोई पदाधिकारी बोलने को तैयार है ना शिक्षामंत्री विजय चौधरी ही कुछ बोलते है । अभ्यर्थी समय समय पर बहाली पूरी करवाने के लिए विभाग से लेकर विधायक और मंत्री तक के यहां गुहार लगा रहे है लेकिन सरकार बहाली के प्रति निरंकुश बनी हुई है ।

कुछ इसी तरह का हाल माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षक भर्ती के बारे में भी है । 2011 के बाद 8 साल बाद 37,000 पदों के लिए माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा STET 2019 आयोजित किया गया । पहली बार परीक्षा का आयोजन जनवरी 2020 में किया गया बाद में कोर्ट में मामला गया और परीक्षा रद्द कर दी गई फिर कोरोना काल में सितम्बर 2021 में ऑनलाइन परीक्षा ली गई ये मामला भी कोर्ट में गया बाद में पटना हाई कोर्ट के आदेश पर ही रिजल्ट घोषित किया गया । कुछ विषयों के रिजल्ट घोषित होने बाकी है । लेकिन अब इस बहाली को पूर्ण करने के बजाए सरकार इसे सातवें चरण की बात कह कर टाल रही है । बताते चलें कि लगभग 30 हजार पदों के लिए छठे चरण का नियोजन ब्लाइंड केस के कारण ही बाधित है । अब एक बार फिर से असामाजिक तत्व बहाली फंसाने को लेकर सक्रिय हो गए है और फिर से बहाली को न्यायालय में चुनौती देने की बात कर रहे है । बहाली के लिए निरंतर प्रयासरत कई संगठन बिहार टीईटी/सीटीईटी/एसटीईटी उत्तीर्ण शिक्षक बहाली मोर्चा, लीगल मामले देख रहे कोर टीम एवं एसटीईटी वर्किंग कमिटी का कहना है कि इससे सफल अभ्यर्थी निराश हताश और परेशान है लेकिन सरकार बहाली के प्रति कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रही है । कोरोना काल में जहां बेरोजगारी चरम सीमा पर है वहीं चुनावी घोषणा पत्र में 19 लाख रोजगार के वादे करने के बावजूद सरकार खाली पड़े पदों को भरने में भी नाकाम साबित हो रहे है । जो रिक्तियां पुरानी है उसे भी ना भरना रोजगार के प्रति सरकार के मंशा पर सवाल खड़ा करती है ।

संवाददाता : ब्रजनंदन यादव की रिपोर्ट (दरभंगा)

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